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RSP: 205- 
फिक़्ह की अवश्यकता एवं इ़माम आज़म की प्रतिष्ठा
DESCRIPTION: :
फिक़्हा इ़ज़ाम ने क़ुरान करीम तथा हदीस के आधार में नियम व सिद्धांत, कानून व अहकाम वर्णन किए हैं अधिक मानव जीवन में जन्म से मृत्यु तक आने वाले सम्पूर्ण मसाइ़ल व अहकाम को इन्हों ने जिल्द अनुसार किताबुल तहारह से किताबुल फराइ़ज़ तक वर्णन किया, जिस के सारांश को फिक़्ह कहा जाता है। इसी लिए इन विश्वसनीय आइ़मा किराम व मुजतहिदीन का पालन व सहायक वास्तव में किताब व सुन्नत ही का पालन करना है।
 
 
 
RSP: 259- 
शबे-बरात की महत्व एवं उत्तमता (ई टी वी उर्दू)
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शबे बरात जिब्रील अमीन सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दरबार में उपस्थित हो कर इस रात इबादत करने वालों की सौभाग्य व भाग्यशाली की सूचना दी
RSP: 260- 
शबे-बरात में खज़ा नमाज़ों के समापन का आदेश
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शबे-बरात में खज़ा नमाज़ों के समापन का आदेश क्या है? जैसा के मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी साहब इ टीवी पर विवरण करते हैं-
RSP: 263- 
शबे-बरातः मोक्ष व मुक्ति की रात
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फिर जब चौथाई रात हुई तो जिब्रील ने सेवा में उपस्थित हो कर निवेदन कियाः ऐ पैकर हम्द व सना! अपना सर अनर उठाएं तो हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने अपना सर अनवर उठाया तो जन्नत के दरवाज़े खुले हैं।
RSP: 265- 
शबे-बरात का क्रान्तिकारी सन्देश (मीलाद मैदान 2012)
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इसलाम अमन व सलामती दान करने वाला, संस्कृति व सभ्यता की शिक्षा देने वाला पावन धर्म है। जिस के अहकाम व सिद्धान्त सर्व जाति के हर सदस्य व हर क़बीले, हर रंग व नसल, हर भाषा व देश के लिए अमन व शान्ति, राहत व धीरज प्रदान करते हैं। जिस का सन्देश अमन से अपने मान्ने वालों तक ही सीमित नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवजाती के लिए है।


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