अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर
     

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द्वारा: हज़रत मौलाना मुफती हाफिज़ सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,
  महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर
     
 
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RSP 267 : रमज़ान की उत्तमता (सहीह बुखारी पर व्याख्यान)
  हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है आप ने फरमायाः हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबा को खुश ख़बरी सुनाते हुए उपदेश फरमायाः तुम्हारे पास रमज़ान के महीने कि आमद आमद (आगामी) है। यह एक बरकत वाला महीना है। अल्लाह तआ़ला ने तुम पर इस के रोज़े फर्ज़ किए हैं। इस में जन्नत के दरवाज़े खोले जाते हैं, दोज़क़ (नरक) के दरवाज़े बन्द किए जाते हैं तथा शैतानों को क़ैद किया जाता है। इस महीने में एक रात है जो हज़ार महीनों से श्रेष्टतर व बेहतर है, जो व्यक्ति उस रात कि भलाई से अज्ञात रहा तो वास्तव में वह अज्ञात रह गया। (मुसनद इ़माम अहमद, मुसनद अबु हुरैरह, हदीस संख्याः 9227)  

 

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